‎नालंदा: सूखा या बड़ा धोखा? 20 प्रखंडों में मानसून की बारिश का आंकड़ा सार्वजनिक करने की उठी मांग ‎



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‎हरनौत (नालंदा)
‎मानसून की विदाई की शुरुआत के साथ ही नालंदा जिले में इस वर्ष हुई बारिश का प्रखंडवार वास्तविक आंकड़ा सामने लाने की मांग तेज हो गई है। जिले के 20 प्रखंडों के किसानों और ग्रामीणों के बीच यह जानने की भारी उत्सुकता है कि उनके क्षेत्र में कुल कितनी मिलीमीटर वर्षा हुई और निर्धारित सामान्य वर्षापात की तुलना में यह कितनी कम या अधिक रही।
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‎ग्रामीणों का कहना है कि पूरे जिले में बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा है। जिले के कुछ इलाकों में जहाँ अच्छी बारिश दर्ज की गई, वहीं कई प्रखंड ऐसे रहे जहाँ बारिश की भारी कमी के चलते किसानों को निजी संसाधनों से सिंचाई के लिए मजबूर होना पड़ा।
‎किसानों का कहना है कि जब तक प्रखंडवार वर्षापात का आधिकारिक डेटा सामने नहीं आता, तब तक जमीनी हकीकत स्पष्ट नहीं हो सकेगी।
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‎ 1. 20 प्रखंडों का अलग-अलग आंकड़ा:1 जून से अब तक जिले के सभी 20 प्रखंडों में कुल कितनी मिमी बारिश हुई, उसे सार्वजनिक किया जाए।
‎ 2. सामान्य बनाम वास्तविक वर्षा: प्रत्येक प्रखंड के लिए निर्धारित सामान्य वर्षापात और उसमें आई कमी या बढ़त का प्रतिशत स्पष्ट किया जाए।
‎ 3. सूखा-प्रभावित क्षेत्रों की पहचान:किन-किन प्रखंडों या पंचायतों में सामान्य से कम बारिश हुई है और क्या उन्हें आधिकारिक रूप से 'सूखा-सदृश' क्षेत्र घोषित किया जाएगा?
‎ 4. फसलों के नुकसान का आकलन:कृषि विज्ञान केंद्र
‎द्वारा डेटा जारी होने से किसानों को खरीफ फसल की वास्तविक स्थिति और आगामी रबी की तैयारी करने में मदद मिलेगी।
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‎मौसम विभाग आधिकारिक तौर पर 1 जून से 30 सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून की अवधि मानता है और नियमित आंकड़े जुटाता है। अब जब मानसून का सीजन पूरा हो चुका है, नालंदा के अन्नदाता और जागरूक ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व कृषि विभाग से अपील की है कि वर्षा का वास्तविक रिपोर्ट कार्ड बिना देरी किए सार्वजनिक किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को राहत और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

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