सरथा पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना चयन पर भारी हंगामा: पांच सौ रुपये वसूली का आरोप, डीएम से पुनः जांच की मांग
हरनौत (नालंदा):
स्थानीय प्रखंड की सरथा पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के चयन को लेकर आयोजित विशेष ग्राम सभा में भारी विवाद और हंगामा उत्पन्न हो गया। ग्रामीणों ने चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता, पक्के मकान वालों को प्राथमिकता देने और सर्वे के नाम पर अवैध वसूली का खुला आरोप लगाया है।
मुखिया प्रतिनिधि रविशंकर प्रसाद सिंह के अनुसार पंचायत में कुल 1650 जरूरतमंदों का सर्वे कराया गया था, किंतु अंतिम सूची में मात्र 482 लोगों को ही सम्मिलित किया गया।
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि पहले से पक्के मकान और सरकारी नौकरी वाले संपन्न परिवारों के नाम आवास सूची में जोड़ दिए गए हैं।झुग्गी-झोपड़ी और कच्चे मकानों में रहने वाले वास्तविक निर्धन परिवार सूची से बाहर कर दिए गए।
सर्वे कार्य में प्रतिनियुक्त कर्मियों द्वारा प्रति परिवार पांच सौ रुपये अवैध रूप से वसूले गए।
ग्रामीणों के तीखे विरोध और हंगामे के कारण नोडल पदाधिकारी को सभा बीच में ही स्थगित कर लौटना पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर देर शाम तक मुखिया प्रतिनिधि को बंधक बनाए रखा। इससे पूर्व ग्रामीणों ने हरनौत प्रखंड कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन भी किया था।
सोमवार को प्रखंड घेराव के पश्चात बड़ी संख्या में ग्रामीण बिहारशरीफ जिला मुख्यालय पहुंचे। वहां ग्रामीणों ने नालंदा की जिलाधिकारी उदिता सिंह को लिखित ज्ञापन सौंपकर पूरी सूची की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नियमानुकूल जांच का आश्वासन दिया है।
प्रखंड आवास पर्यवेक्षक रविकर रवि ने मामले पर कहा कि पूरे प्रखंड में लगभग बीस हजार लोगों का सर्वेक्षण हुआ था, जिसमें सरथा पंचायत का सर्वे एक पंचायत रोजगार सेवक द्वारा किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध राशि लेने का आरोप जांच का विषय है। सरकार द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों में लगभग बारह हजार नाम हैं, जिनमें से सभी अपात्र व्यक्तियों के नाम सत्यापन उपरांत हटा दिए जाएंगे।

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